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तीखे सुर: मुआवजे की मांग को लेकर मंदसौर की सड़कों पर उतरे कांग्रेसी, कलेक्ट्रेट का घेराव कर सरकार को घेरा
01 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर के ऐतिहासिक गांधी चौराहे से लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय तक आज कांग्रेसियों ने जोरदार हुंकार भरी। विधायक विपिन जैन के नेतृत्व में सैकड़ों की तादाद में एकत्र हुए कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और पीड़ित किसानों ने पैदल मार्च निकाला और सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया कि हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से क्षेत्र के किसानों की फसलें पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं, लेकिन सरकार द्वारा घोषित मुआवजा राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए विधायक विपिन जैन ने दोटूक शब्दों में कहा कि प्रशासन और सरकार किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कना बंद करे। वर्तमान मुआवजा राशि इतनी कम है कि इससे किसानों की लागत भी वसूल नहीं हो पा रही है। उन्होंने मांग की कि राहत राशि को तत्काल प्रभाव से बढ़ाकर न्यायसंगत किया जाए, अन्यथा कांग्रेस सड़क से लेकर विधानसभा तक इस लड़ाई को और उग्र करेगी।
पैदल मार्च के कलेक्ट्रेट पहुंचने पर कांग्रेसियों ने प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में महामहिम राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद नजर आया। कांग्रेसी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर किसानों के हित में फैसला नहीं लिया गया, तो उग्र चक्काजाम किया जाएगा।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए विधायक विपिन जैन ने दोटूक शब्दों में कहा कि प्रशासन और सरकार किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कना बंद करे। वर्तमान मुआवजा राशि इतनी कम है कि इससे किसानों की लागत भी वसूल नहीं हो पा रही है। उन्होंने मांग की कि राहत राशि को तत्काल प्रभाव से बढ़ाकर न्यायसंगत किया जाए, अन्यथा कांग्रेस सड़क से लेकर विधानसभा तक इस लड़ाई को और उग्र करेगी।
पैदल मार्च के कलेक्ट्रेट पहुंचने पर कांग्रेसियों ने प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में महामहिम राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद नजर आया। कांग्रेसी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर किसानों के हित में फैसला नहीं लिया गया, तो उग्र चक्काजाम किया जाएगा।