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गांधी सागर परियोजना पर गहराया संकट: राजस्थान की आपत्ति के बाद अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंचा विवाद
03 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर और नीमच जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली गांधी सागर परियोजना का भविष्य अब कानूनी पचड़े में फंस गया है। राजस्थान सरकार की ओर से जताई गई तीखी आपत्ति के बाद यह बहुप्रतीक्षित मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) की चौखट पर पहुंच चुका है। इसके चलते बांध से जुड़े विस्तारीकरण और पानी के बंटवारे के निर्माण कार्य फिलहाल अधर में लटक गए हैं, जिससे स्थानीय प्रशासनिक अमले और जल संसाधन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक, गांधी सागर बांध से सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को लेकर मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही थी। हाल ही में परियोजना के नए फेज के तहत जब जल संसाधन विभाग ने निर्माण गतिविधियों को गति दी, तो राजस्थान जल संसाधन विभाग ने जल भराव क्षेत्र और डूब सीमा को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज करा दीं। दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत के जरिए समाधान न निकलने के कारण यह गतिरोध अब कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है।
इस अदालती दांवपेच के कारण करोड़ों रुपये की इस परियोजना की लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, क्षेत्र के किसानों और आम नागरिकों में भी गहरी मायूसी है, जो इस परियोजना से मिलने वाले पानी का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अब आगामी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद ही तय होगा कि चंबल की इस महत्वाकांक्षी योजना का काम कब दोबारा रफ्तार पकड़ पाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, गांधी सागर बांध से सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को लेकर मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही थी। हाल ही में परियोजना के नए फेज के तहत जब जल संसाधन विभाग ने निर्माण गतिविधियों को गति दी, तो राजस्थान जल संसाधन विभाग ने जल भराव क्षेत्र और डूब सीमा को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज करा दीं। दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत के जरिए समाधान न निकलने के कारण यह गतिरोध अब कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है।
इस अदालती दांवपेच के कारण करोड़ों रुपये की इस परियोजना की लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, क्षेत्र के किसानों और आम नागरिकों में भी गहरी मायूसी है, जो इस परियोजना से मिलने वाले पानी का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अब आगामी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद ही तय होगा कि चंबल की इस महत्वाकांक्षी योजना का काम कब दोबारा रफ्तार पकड़ पाएगा।