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सांदीपनि स्कूल की मनमानी: आंखों के सामने से गुजरती है खाली बस, फिर भी 6 किमी पैदल चलने को मजबूर हैं मासूम नौनिहाल
06 August 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर के संजीत मार्ग पर स्थित सांदीपनि स्कूल प्रबंधन की एक बड़ी लापरवाही और संवेदनहीनता का मामला सामने आया है। यहां ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मासूम स्कूली बच्चे रोजाना करीब 6 किलोमीटर का सफर धूल और धूप के बीच पैदल तय करने को मजबूर हैं। बेहद हैरान करने वाली बात यह है कि जिस मार्ग से ये बच्चे पैदल गुजरते हैं, ठीक उसी मार्ग से स्कूल की बसें उनके सामने से खाली निकल जाती हैं, लेकिन उन्हें बस में बिठाने वाला कोई नहीं है।
इस मामले को लेकर पालकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। अभिभावकों का आरोप है कि उन्होंने स्कूल प्रबंधन को भारी-भरकम फीस के साथ-साथ परिवहन शुल्क का भी भुगतान किया है। इसके बावजूद बच्चों को इस तरह मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। जब ग्रामीणों ने इस अव्यवस्था के खिलाफ स्कूल प्रशासन से संपर्क साधा, तो प्रबंधन ने कोई भी संतोषजनक जवाब देने के बजाय पल्ला झाड़ लिया।
मामला तूल पकड़ते ही जिला शिक्षा विभाग भी हरकत में आ गया है। इस संबंध में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने इस गंभीर लापरवाही की तफ्तीश शुरू कर दी है और सांदीपनि स्कूल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी कर ली है। अब देखना यह होगा कि इस मनमानी पर कब तक नकेल कसी जाती है।
इस मामले को लेकर पालकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। अभिभावकों का आरोप है कि उन्होंने स्कूल प्रबंधन को भारी-भरकम फीस के साथ-साथ परिवहन शुल्क का भी भुगतान किया है। इसके बावजूद बच्चों को इस तरह मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। जब ग्रामीणों ने इस अव्यवस्था के खिलाफ स्कूल प्रशासन से संपर्क साधा, तो प्रबंधन ने कोई भी संतोषजनक जवाब देने के बजाय पल्ला झाड़ लिया।
मामला तूल पकड़ते ही जिला शिक्षा विभाग भी हरकत में आ गया है। इस संबंध में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने इस गंभीर लापरवाही की तफ्तीश शुरू कर दी है और सांदीपनि स्कूल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी कर ली है। अब देखना यह होगा कि इस मनमानी पर कब तक नकेल कसी जाती है।