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मंदसौर जिला अस्पताल की शर्मनाक तस्वीर: खून से लथपथ बुजुर्ग खुद हाथ में थामे रहा ड्रिप, संवेदनहीनता की हद पार
21 July 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर जिला चिकित्सालय के सर्जिकल वार्ड से स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता और बदहाली की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहाँ भर्ती एक खून से लथपथ बुजुर्ग मरीज वार्ड में खुद अपने हाथों में ड्रिप (आईवी फ्लूइड की बोतल) थामे नजर आया। बेड पर पड़े इस लाचार बुजुर्ग की सुध लेने वाला कोई जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मी वहां मौजूद नहीं था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे में गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग को इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया था। प्राथमिक उपचार के नाम पर उन्हें ड्रिप तो चढ़ा दी गई, लेकिन उसे टांगने के लिए स्टैंड तक मयस्सर नहीं हुआ। मजबूरन दर्द से कराहते हुए बुजुर्ग को खुद ही खून से सने हाथों से बोतल पकड़कर लेटना पड़ा। इस बदहाली का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अस्पताल की इस घोर लापरवाही पर कड़ा रोष जताया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने जांच के आदेश दिए हैं और ड्यूटी पर तैनात पैरामेडिकल स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, 'हेलो मंदसौर डेली' की पड़ताल में यह बात साफ है कि जिला अस्पताल में ऐसी अव्यवस्थाएं अब आम हो चुकी हैं, जिससे गरीब मरीजों की जान हमेशा जोखिम में बनी रहती है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे में गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग को इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया था। प्राथमिक उपचार के नाम पर उन्हें ड्रिप तो चढ़ा दी गई, लेकिन उसे टांगने के लिए स्टैंड तक मयस्सर नहीं हुआ। मजबूरन दर्द से कराहते हुए बुजुर्ग को खुद ही खून से सने हाथों से बोतल पकड़कर लेटना पड़ा। इस बदहाली का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अस्पताल की इस घोर लापरवाही पर कड़ा रोष जताया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने जांच के आदेश दिए हैं और ड्यूटी पर तैनात पैरामेडिकल स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, 'हेलो मंदसौर डेली' की पड़ताल में यह बात साफ है कि जिला अस्पताल में ऐसी अव्यवस्थाएं अब आम हो चुकी हैं, जिससे गरीब मरीजों की जान हमेशा जोखिम में बनी रहती है।