General
जिला अस्पताल के एमसीएच विंग में जल्द शुरू होगा नया लेबर रूम और ओटी, कलेक्टर ने खुद संभाला मोर्चा
18 July 2026
•
By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर के जिला चिकित्सालय परिसर में नवनिर्मित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) ब्लॉक को पूरी तरह शुरू करने के लिए प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है। कलेक्टर ने औचक रूप से जिला अस्पताल का दौरा कर एमसीएच भवन की जमीनी व्यवस्थाओं को बारीकी से परखा। उन्होंने सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि नवनिर्मित भवन में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और लेबर रूम को बिना किसी हीलाहवाली के जल्द से जल्द क्रियाशील किया जाए, ताकि प्रसूताओं को अत्याधुनिक सुविधाएं मिल सकें।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने न केवल चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता जांची, बल्कि बिजली-पानी की सुचारू आपूर्ति और साफ-सफाई का भी कड़ा जायजा लिया। सिविल सर्जन को निर्देशित किया गया कि डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का सही नियोजन कर ड्यूटी चार्ट तैयार करें, जिससे मरीजों को २४ घंटे सेवाएं मिल सकें। इस दौरान कलेक्टर ने वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद कर अस्पताल की व्यवस्थाओं और मुफ्त दवाओं की उपलब्धता का फीडबैक भी लिया।
प्रशासन की इस मुस्तैदी से अब उम्मीद जगी है कि अगले कुछ ही दिनों में एमसीएच विंग का नया लेबर रूम और ओटी सुचारू रूप से काम करना शुरू कर देगा। इस नई व्यवस्था से जिला अस्पताल के मुख्य भवन पर मरीजों का भारी दबाव कम होगा और जिले के ग्रामीण अंचलों से आने वाली प्रसूताओं को प्रसव के लिए निजी अस्पतालों के महंगे इलाज से मुक्ति मिलेगी।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने न केवल चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता जांची, बल्कि बिजली-पानी की सुचारू आपूर्ति और साफ-सफाई का भी कड़ा जायजा लिया। सिविल सर्जन को निर्देशित किया गया कि डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का सही नियोजन कर ड्यूटी चार्ट तैयार करें, जिससे मरीजों को २४ घंटे सेवाएं मिल सकें। इस दौरान कलेक्टर ने वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद कर अस्पताल की व्यवस्थाओं और मुफ्त दवाओं की उपलब्धता का फीडबैक भी लिया।
प्रशासन की इस मुस्तैदी से अब उम्मीद जगी है कि अगले कुछ ही दिनों में एमसीएच विंग का नया लेबर रूम और ओटी सुचारू रूप से काम करना शुरू कर देगा। इस नई व्यवस्था से जिला अस्पताल के मुख्य भवन पर मरीजों का भारी दबाव कम होगा और जिले के ग्रामीण अंचलों से आने वाली प्रसूताओं को प्रसव के लिए निजी अस्पतालों के महंगे इलाज से मुक्ति मिलेगी।