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मंदसौर जिला अस्पताल की शर्मनाक तस्वीर: खून से लथपथ बुजुर्ग खुद थामे रहा ड्रिप, स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल
19 July 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और संवेदनहीनता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे जिले के प्रशासनिक अमले और स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अस्पताल में इलाज कराने आए एक गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग मरीज को न तो कोई स्ट्रेचर नसीब हुआ और न ही कोई वार्ड बॉय मदद के लिए आगे आया। हद तो तब हो गई जब सिर से लगातार बहते खून के बीच बुजुर्ग को खुद ही अपने एक हाथ में ग्लूकोज की बोतल (ड्रिप) थामकर वार्ड की तरफ बढ़ना पड़ा। अस्पताल प्रबंधन की इस घोर लापरवाही को देखकर वहां मौजूद अन्य मरीजों के परिजन भी दंग रह गए।
इस हृदयविदारक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि आपातकालीन वार्ड में तैनात नर्सिंग स्टाफ और ड्यूटी डॉक्टर अपनी कुर्सियों से उठने को भी तैयार नहीं थे। जब स्थानीय लोगों और परिजनों ने इस बदइंतजामी पर हंगामा खड़ा किया, तब जाकर जिम्मेदार अधिकारी हरकत में आए। हमेशा की तरह अब सिविल सर्जन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMHO) जांच की बात कहकर मामले की लीपापोती करने में जुटे हैं, लेकिन स्थानीय जनता में इस घोर लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है।
'Hello Mandsaur Daily' की पड़ताल में सामने आया है कि अस्पताल के 'कायाकल्प' के बड़े-बड़े दावों और करोड़ों के बजट के बावजूद जमीनी हकीकत बेहद दयनीय है। मरीजों के लिए खरीदे गए स्ट्रेचर और व्हीलचेयर कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं, जबकि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की मुस्तैदी केवल कागजों तक ही सीमित है। अब देखना यह है कि कलेक्टर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई करते हैं या इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
इस हृदयविदारक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि आपातकालीन वार्ड में तैनात नर्सिंग स्टाफ और ड्यूटी डॉक्टर अपनी कुर्सियों से उठने को भी तैयार नहीं थे। जब स्थानीय लोगों और परिजनों ने इस बदइंतजामी पर हंगामा खड़ा किया, तब जाकर जिम्मेदार अधिकारी हरकत में आए। हमेशा की तरह अब सिविल सर्जन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMHO) जांच की बात कहकर मामले की लीपापोती करने में जुटे हैं, लेकिन स्थानीय जनता में इस घोर लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है।
'Hello Mandsaur Daily' की पड़ताल में सामने आया है कि अस्पताल के 'कायाकल्प' के बड़े-बड़े दावों और करोड़ों के बजट के बावजूद जमीनी हकीकत बेहद दयनीय है। मरीजों के लिए खरीदे गए स्ट्रेचर और व्हीलचेयर कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं, जबकि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की मुस्तैदी केवल कागजों तक ही सीमित है। अब देखना यह है कि कलेक्टर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई करते हैं या इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।