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मंदसौर में मानसून पर लगा ब्रेक: तेज धूप और उमस से लोग हलाकान, सूखती फसलों को देख किसानों के माथे पर खिंची चिंता की लकीरें
19 July 2026
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By HelloMandsaur Auto-Editor
मंदसौर जिले में झमाझम बारिश की आस लगाए बैठे अन्नदाताओं और आम नागरिकों को अब तीखी धूप और उमस की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। पिछले आठ दिनों से मानसूनी गतिविधियों पर पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। सुबह से ही आसमान साफ रहने के कारण तेज धूप निकल रही है, जिससे पारे में एकाएक उछाल आया है। दोपहर होते-होते उमस का सितम इस कदर बढ़ जाता है कि लोगों का सड़कों पर निकलना दूभर हो गया है और पंखे-कूलर भी राहत देने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
मौसम के इस बदले मिजाज से सबसे ज्यादा चिंतित जिले के किसान हैं। खेतों में खड़ी सोयाबीन और अन्य खरीफ की फसलों को इस वक्त अमृत रूपी पानी की सख्त जरूरत है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले दो-तीन दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो फसलों में पीलापन आने लगेगा जिससे पैदावार पर भारी विपरीत असर पड़ेगा। सिंचाई के पर्याप्त साधन न होने के कारण पथरीले और ऊंचे इलाकों में फसलें मुरझाने की कगार पर पहुंच चुकी हैं, जिससे किसानों की रात की नींद उड़ गई है।
स्थानीय मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में कोई मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय न होने के कारण हवाओं का रुख बदला है और बारिश थम गई है। हालांकि, आसमान में यदा-कदा स्थानीय बादलों की आवाजाही बनी हुई है, लेकिन वे बिना बरसे ही आगे निकल रहे हैं। उमस भरे इस मौसम ने जहां बिजली की मांग बढ़ा दी है, वहीं अस्पतालों में भी मौसमी बीमारियों के मरीजों की तादाद बढ़ने लगी है। अब पूरे अंचल की निगाहें बादलों की ओर टिकी हैं कि कब राहत की फुहारें बरसें।
मौसम के इस बदले मिजाज से सबसे ज्यादा चिंतित जिले के किसान हैं। खेतों में खड़ी सोयाबीन और अन्य खरीफ की फसलों को इस वक्त अमृत रूपी पानी की सख्त जरूरत है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले दो-तीन दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो फसलों में पीलापन आने लगेगा जिससे पैदावार पर भारी विपरीत असर पड़ेगा। सिंचाई के पर्याप्त साधन न होने के कारण पथरीले और ऊंचे इलाकों में फसलें मुरझाने की कगार पर पहुंच चुकी हैं, जिससे किसानों की रात की नींद उड़ गई है।
स्थानीय मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में कोई मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय न होने के कारण हवाओं का रुख बदला है और बारिश थम गई है। हालांकि, आसमान में यदा-कदा स्थानीय बादलों की आवाजाही बनी हुई है, लेकिन वे बिना बरसे ही आगे निकल रहे हैं। उमस भरे इस मौसम ने जहां बिजली की मांग बढ़ा दी है, वहीं अस्पतालों में भी मौसमी बीमारियों के मरीजों की तादाद बढ़ने लगी है। अब पूरे अंचल की निगाहें बादलों की ओर टिकी हैं कि कब राहत की फुहारें बरसें।